श्री महालक्ष्मी जगदम्बा संस्थान

इतिहास

जाखापुरनरेश झोलन के सात पुत्र थे - जनोबा, नानोबा, बानोबा, बैरोबा, खैरोबा, अग्नोबा, दत्तासूर| परंतु एक भी पुत्री ना होने के कारण राजा दुखी थे| अत: राजाने यज्ञ, होम, हवन, पूजा करके ईश्वर से कन्याप्राप्ति का वर माँगा| तेजोमय एवं दैवी रूपगुणसम्पन्न शक्ति कन्या के रूप में अवतरित हुई| आदिमाया के दिव्यशक्ति की अनुभूति राजा को कई बार हुई| अनेक कठिण प्रसंगो में माँ ने योग्य दिशादर्शन किया|एक युद्ध प्रसंग में राजा के शत्रु का भी यथायोग्य निर्णय देकर जगदंबा ने अपनी न्यायप्रियता का दर्शन कराया| अवतारकार्य की समाप्ति पर सूर्यास्त के समय महालक्ष्मी जिस स्थान पर विराजमान हुई उसे ‘जाखापुर’ कहते हैं| यह एक शक्तिपीठ माना जाता है|

माँ जगदम्बा की मूर्ति स्वयंभू है| मंदिर के हेमाडपन्थी स्थापत्यकला से उसकी प्राचीनता का एहसास होता है| भारतीय जीवन के चार आधारस्तंभ - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन सभी में माँ जगदम्बा के दर्शन से यशाप्राप्ति होती है ऐसी भक्तों की श्रद्धा है|

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