Shri Mahalaxmi Jagdamba Sansthan

Shlok and Aarti

Durga Maa Arti

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविन संसारी।
अनाथ नाथे अंबे करुणा विस्तारी।
हारी पडलो आता संकट निवारी।१।

जय देवी जय देवी जय महिषासूर मथनी।
सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजिवनी।धृ।

त्रिभुवन भुवनी पहाता तुज ऐसे नाही।
चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही।
साही विवाद करिता पडले प्रवाही।
ते तू भक्ता लागी। ते तू दासा लागी।
पावसी लवलाही। जय देवी।२।

प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा।
क्लेशापासून सोडी। दुःखापासून सोडी।
तोडी भावपाशा।

अंबे तुजवाचुनी कोण पुरविल ही आशा।
नरहरी तल्लीन झाला पद पंकजलेशा।३। जय देवी।

Gondhad

गोंधळ घालू या ग गोंधळ मांडू या ग।,
महिषासुरमर्दिनीचा गोंधळ घालू या ग,
गोंधळ घालू या ग।।

त्रैलोक्याची जी स्वामिनी। आदिशक्ती श्रीभवानी
चंडिका ही महालक्ष्मी चला पाहू या।।१।।

तेजोमय अंत:स्फूर्ती। अंतरीची दिव्य ज्योती
पाजळोनी स्वातंत्र्याची दिवटी लावू या।।२।।

मंगल लेणे सौभाग्याचे। काजळ कुंकू रिपूरक्ताचे
या ग त्याने जगदंबेचे मळवट भरू या।।३।।

स्वातंत्र्याच्या दुष्मनांची। मस्तक तोडूनी चांडाळांची
या ग त्याने जगदंबेची ओटी भरू या।।४।।

गोंधळात दंग होऊ। उदोकारे गर्जत राहू
शुभदा वरदा जगन्माता तृप्त करू या।।५।।

Shri Mahalaxmi Aarti

चलारे चला जाखापुरी चला।
महामाया प्रगटली।
आरती करू या मनोभावे।धृ।

शीव शक्ती प्रगटली।
विष्णू लक्ष्मी प्रगटली।
ब्रम्ह बम्हणी प्रगटली।
दर्शन घ्यावे दुःख विसरावे।
आरती करू या मनोभावे।।१।।

हिरवी साडी हिरवी चोळी।
हिरवा चुडा असे बिल्लोरी।
हिरवी सृष्टी हिरवे पक्षी।
भक्त देखती प्रेम भरे।
शंख फुंकावे ब्रह्मांदी नाचावे।
आरती करू या मनोभावे।।२।।

पायी पैजण रूनझुणती।
जोडवे मासोळ्या संग देती।
कटी पट्टी लेवुनी बुट्टा।
पाटल्या कनकाच्या मनगटी।
रवि शशी निस्तेज होती।
चवरे हालवावे उध्व पंथे देखावे।
आरती करू या मनोभावे।।३।।

कर्णी बाळ्या बुगड्या शोभती।
नासिकी नत्थनी दर्जेदार डूलती।
शिरी निट मुकुट चमकती।
रेशमी वेणी पाठीवर रुळती।
पश्चिम मार्गी आईची प्राप्ती होणे।
आरती करू या मनोभावे।।४।।

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